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चलो चलें पांच मई को ज्ञान की गंगा में गोते लगाने श्री श्याम बैकुंठ धाम श्यामपुर हरिद्वार हरिद्वार 

विजय कुमार बंसल हरिद्वार ब्यूरो

चलो चलें पांच मई को ज्ञान की गंगा में गोते लगाने श्री श्याम बैकुंठ धाम श्यामपुर हरिद्वार हरिद्वार IMG 20260426 WA0038

पावन धरा, श्यामपुर कांगड़ी स्थित श्री श्याम वैकुंठ धाम का वातावरण मानो स्वयं भक्ति रस में स्नान कर रहा था। प्रातः स्मरणीय गुरु भगवन श्री महंत श्याम सुंदर महाराज ने अपने श्रीमुख से जो अमृत वचन भक्तजनों को सुनाए, वे केवल शब्द नहीं थे, बल्कि आत्मा को झकझोर देने वाली दिव्य अनुभूति थी। उनके वचनों में करुणा भी थी, चेतना भी थी और वह अदृश्य पुकार भी थी जो मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से जोड़ देती है।

महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य का जीवन क्षणभंगुर है, फिर भी वह “मैं”, “मेरा”, “तेरा” और “इसका” की सीमाओं में उलझकर अपने ही अंतःकरण का दीपक बुझा लेता है। वह संसार के मोह में इतना लिप्त हो जाता है कि उसे यह स्मरण ही नहीं रहता कि अंततः सब कुछ यहीं छूट जाना है। न धन साथ जाता है, न वैभव, न संबंधों का अहंकार—साथ जाता है केवल नाम और कर्म का फल।उन्होंने करुण स्वर में समझाया कि जब तक जीवन में शक्ति और सामर्थ्य है, तब तक मनुष्य भोग-विलास और व्यर्थ की दौड़ में समय गंवा देता है, और जब शरीर शिथिल हो जाता है, इंद्रियाँ साथ छोड़ देती हैं, तब उसे प्रभु स्मरण की याद आती है। किंतु उस समय की भक्ति वैसी प्रबल नहीं होती, क्योंकि शरीर तो निष्क्रिय हो चुका होता है और मन भी संसार के बोझ से थक चुका होता है।गुरुदेव ने कहा कि वास्तविक कल्याण इसी में है कि मनुष्य प्रत्येक क्षण, हर श्वास के साथ भगवान श्री राम और भगवान श्री नारायण का नाम स्मरण करता रहे। नाम ही वह नाव है जो भवसागर से पार ले जाती है, और यही वह दीपक है जो अज्ञान के अंधकार को हर लेता है।उनके शब्दों में एक अद्भुत शांति थी—मानो आत्मा स्वयं भीतर झांककर अपने खोए हुए सत्य को खोज रही हो। उन्होंने कहा कि भक्ति कोई अंतिम समय की आवश्यकता नहीं, बल्कि जीवन की हर सांस का उत्सव है। जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर “मैं” को मिटा देता है, तभी “राम” का प्रकाश भीतर प्रकट होता है।यह वचन केवल उपदेश नहीं थे, बल्कि हृदय को स्पर्श करने वाली वह दिव्य ध्वनि थी जो मनुष्य को उसके वास्तविक लक्ष्य—मुक्ति—की ओर जागृत करती है। भक्तजन उस क्षण भाव-विभोर हो उठे, मानो आत्मा स्वयं प्रभु नाम में विलीन होने को आतुर हो गई हो। श्याम बैकुंठ धाम का तृतीय वार्षिक महोत्सव हरिद्वार सहित देश के प्रबुद्ध संतो तथा महापुरुषों की गरिमा मय उपस्थित के बीच 5 मई 2026 को होने जा रहा है जिसमें देश भर के श्रद्धालु भक्तों को ज्ञान की गंगा में गोते लगाने का सौभाग्य प्राप्त होगा चलो चलें श्री श्याम वैकुंठ धाम

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